रूस के मास्को शहर में सुबह के ठीक चार बजे आसमान में अजीब सी गड़गड़ाहट गूंजने लगी। अगले तीन घंटों के भीतर यूक्रेन के करीब 137 से अधिक ड्रोनों ने रूसी राजधानी को घेर लिया। यह कोई मामूली हवाई हमला नहीं था। निशाना बिल्कुल साफ था—मास्को ऑयल रिफाइनरी (MNPZ)। इस भीषण हमले ने रूस के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले हवाई सुरक्षा तंत्र की धज्जियां उड़ा दीं। नतीजा यह हुआ कि रूस में पेट्रोल-डीजल की किल्लत अब एक डरावनी सच्चाई बन चुकी है। यह संकट कितना बड़ा है? इसका अंदाजा इस बात से लगाइए कि मास्को की यह लाइफलाइन अब कम से कम छह महीने के लिए पूरी तरह ठप हो चुकी है।
अगर आप सोच रहे हैं कि यह सिर्फ एक रिफाइनरी में लगी आग का मामला है, तो आप गलत हैं। यह रूस के पूरे घरेलू ईंधन तंत्र पर एक ऐसा सर्जिकल स्ट्राइक है जिसने क्रेमलिन की कमर तोड़ दी है। Expanding on this topic, you can also read: Why The Fatal Jordan Base Attack Signals A Dangerous Shift For American Troops.
मास्को ऑयल रिफाइनरी का ठप होना क्यों रूस के लिए तबाही है
सच कहें तो मास्को की कापोटन्या रिफाइनरी सिर्फ तेल साफ करने का कारखाना नहीं है। यह मास्को और उसके आस-पास के इलाकों की रीढ़ की हड्डी है। यह अकेली रिफाइनरी रूसी राजधानी की लगभग 40 फीसदी पेट्रोल और डीजल की जरूरतों को पूरा करती है। आंकड़ों के लिहाज से देखें तो इस प्लांट ने साल 2024 में 11.6 मिलियन मीट्रिक टन कच्चे तेल को प्रोसेस किया था। इसमें करीब 2.9 मिलियन टन पेट्रोल और 3.2 मिलियन टन डीजल शामिल था।
अब जरा सोचिए। जब इतना बड़ा हब अचानक गायब हो जाए तो क्या होगा? इस महीने यूक्रेन ने एक के बाद एक दो बार इस पर हमला किया। रॉयटर्स की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि इस रिफाइनरी को दोबारा चालू करने में कम से कम आधा साल यानी छह महीने का वक्त लगेगा। इसका सीधा मतलब यह है कि साल 2026 में इस रिफाइनरी से तेल उत्पादन की उम्मीद ना के बराबर है। Experts at USA Today have also weighed in on this matter.
यूक्रेन की रणनीति अब बिल्कुल साफ है। वे अब सिर्फ प्रतीकात्मक हमले नहीं कर रहे। वे रूस के आर्थिक और सैन्य लॉजिस्टिक्स के कोर पर वार कर रहे हैं। जब किसी देश की राजधानी में ही गाड़ियों के पहिए थमने लगें, हवाई जहाजों को ईंधन न मिले, तो युद्ध की गंभीरता आम जनता के ड्राइंग रूम तक पहुंच जाती है।
21 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा रूसी तेल उत्पादन
इस हमले के बाद रूस की कुल तेल रिफाइनिंग क्षमता घटकर 4 मिलियन बैरल प्रतिदिन से भी नीचे चली गई है। यह पिछले 21 सालों का सबसे निचला स्तर है। साल 2005 के बाद से रूस ने कभी अपने तेल उद्योग की ऐसी दुर्दशा नहीं देखी थी।
एक अनुमान के मुताबिक रूस की कुल रिफाइनिंग क्षमता का लगभग एक-तिहाई हिस्सा इस समय पूरी तरह बंद या क्षतिग्रस्त हो चुका है। जब देश के 11 टाइम ज़ोन में फैला हुआ पूरा तंत्र हिल जाता है, तो उसके असर को छिपाना नामुमकिन हो जाता है। रूस के 25 से अधिक क्षेत्रों में पेट्रोल की राशनिंग शुरू हो चुकी है। पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लगी हैं। हालात इतने खराब हैं कि छह प्रमुख शहरों के हवाई अड्डों पर जेट ईंधन (एविएशन फ्यूल) की भारी कमी हो गई है, जिससे घरेलू उड़ानों पर सीधा असर पड़ रहा है।
सिचेन ड्रोन जिसने मास्को के एयर डिफेंस को फेल कर दिया
इस पूरे खेल में यूक्रेन का एक नया हथियार सबसे बड़ा विलेन बनकर उभरा है। इसका नाम है 'सिचेन' (Sichen) कामिकाजे ड्रोन। अप्रैल 2026 में पहली बार दुनिया के सामने आया यह सुसाइड ड्रोन बेहद खतरनाक है। इसकी रेंज करीब 1400 किलोमीटर है और यह 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ सकता है।
इस हमले की सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि ये ड्रोन बेहद कम ऊंचाई पर उड़ते हुए सीधे रिफाइनरी की तरफ बढ़े। मास्को जैसे शहर की सुरक्षा के लिए रूस ने अपने सबसे बेहतरीन S-400 और पैंट्सिर एयर डिफेंस सिस्टम तैनात कर रखे हैं। लेकिन यूक्रेन ने एक साथ 137 से 180 ड्रोनों का झुंड भेजकर इस पूरे डिफेंस नेटवर्क को 'सैचुरेट' यानी ठप कर दिया। जब आसमान में एक साथ इतने सारे टारगेट हों, तो दुनिया का कोई भी डिफेंस सिस्टम हर एक ड्रोन को नहीं गिरा सकता। कुछ ड्रोन सुरक्षा घेरे को भेदकर सीधे अपने निशाने पर जा लगे और देखते ही देखते पूरी रिफाइनरी आग के शोलों में बदल गई।
एक मज़ेदार बात और समझिए। यूक्रेन के इन देसी ड्रोनों की लागत रूस की महंगी इंटरसेप्टर मिसाइलों के मुकाबले बेहद कम है। आर्थिक रूप से यह लड़ाई पूरी तरह से यूक्रेन के पक्ष में झुक रही है। यूक्रेन का कुछ हजार डॉलर का ड्रोन रूस के करोड़ों डॉलर के इंफ्रास्ट्रक्चर को मलबे में तब्दील कर रहा है।
क्रीमिया में बिक्री बंद और सरकार के बेबस फैसले
ईंधन संकट की सबसे भीषण मार यूक्रेन की सीमा से लगे इलाकों और क्रीमिया पर पड़ी है। क्रीमिया में तो आम जनता के लिए पेट्रोल की बिक्री को अस्थायी रूप से सस्पेंड तक करना पड़ा है। स्थिति को संभालने के लिए रूसी उप-प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने संकेत दिए हैं कि सरकार जल्द ही डीजल के निर्यात पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा सकती है।
इसके अलावा रूस के इतिहास में शायद पहली बार यह स्थिति आ रही है कि दुनिया का सबसे बड़ा ऊर्जा उत्पादक देशों में से एक अब समंदर के रास्ते ईंधन आयात करने की योजना बना रहा है। यही नहीं, तेल की तात्कालिक कमी को पूरा करने के लिए क्रेमलिन ने रिफाइनरियों को घटिया स्तर (Below-standard) का पेट्रोल बनाने की भी छूट दे दी है। यह फैसला दिखाता है कि पुतिन सरकार इस समय कितनी हताश हो चुकी है।
रूस के सामने अब दोहरी मुसीबत है। अगर वह अपनी बची-कुची एयर डिफेंस प्रणालियों को मास्को की रिफाइनरियों को बचाने में लगाता है, तो फ्रंटलाइन पर उसकी सेना कमजोर पड़ती है। अगर वह फ्रंटलाइन पर ध्यान देता है, तो मास्को के लोग बिना तेल के सड़कों पर आ जाएंगे।
यूक्रेन का यह ड्रोन अभियान थमा नहीं है। वह लगातार एक ही टारगेट पर बार-बार वार कर रहा है ताकि रूस को मरम्मत करने का मौका ही न मिले। आने वाले हफ्तों में वैश्विक तेल बाजार और रूस की आंतरिक राजनीति में क्या बदलाव आते हैं, इस पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी। फिलहाल के लिए, रूस के भीतर पेट्रोल की हर बूंद के लिए मची त्राहि-त्राहि ने युद्ध की दिशा बदल दी है।