होर्मुज जलडमरूमध्य में ओमान का नया रास्ता ईरान को क्यों हजम नहीं हो रहा

होर्मुज जलडमरूमध्य में ओमान का नया रास्ता ईरान को क्यों हजम नहीं हो रहा

वैश्विक तेल बाजार और खाड़ी देशों की राजनीति में इस समय जबरदस्त खींचतान चल रही है। सब जानते हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ता है। इसी रास्ते पर अब एक नया विवाद खड़ा हो गया है। ओमान ने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन के सहयोग से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए एक नया और अस्थायी समुद्री रास्ता शुरू कर दिया। बस यही बात ईरान को बिल्कुल पसंद नहीं आई। ईरान की ओर से तुरंत तीखी चेतावनियां आने लगीं। तेहरान का साफ कहना है कि उसके साथ तालमेल किए बिना इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है।

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच साठ दिनों के अंतरिम युद्धविराम को लेकर बातचीत चल रही है। पूरी दुनिया को लग रहा था कि शायद अब खाड़ी में शांति लौट आएगी। ओमान के इस कदम ने इस पूरे समीकरण को बदल दिया है। इस नए रास्ते के खुलते ही जहाजों की आवाजाही में सौ प्रतिशत से ज्यादा का उछाल देखा गया। यह बात ईरान की उस रणनीतिक बढ़त को कमजोर करती है जो उसे इस जलमार्ग पर हासिल थी।

ओमान का नया कॉरिडोर और टोल टैक्स का असली खेल

पूरी कहानी को समझने के लिए हमें थोड़ा पीछे जाना होगा। इस साल की शुरुआत में जब तनाव चरम पर था तब ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर एक नया नियम थोपने की कोशिश की थी। ईरान की संसदीय समिति ने बकायदा मतदान करके यह तय करने का प्रयास किया था कि इस रास्ते से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों से एक निश्चित सुरक्षा शुल्क या ट्रांजिट टोल वसूला जाए। अमेरिका और इजराइल के जहाजों पर तो प्रतिबंध लगाने की बात भी कही गई थी। ईरान का तर्क था कि वह इस क्षेत्र में सुरक्षा मुहैया कराता है इसलिए उसे यह टैक्स मिलना चाहिए।

ओमान ने इस पूरी योजना के समानांतर एक बिल्कुल अलग रास्ता चुन लिया। उसने अपने तट के करीब से गुजरने वाले दो नए अस्थायी समुद्री मार्ग घोषित कर दिए। ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल-बुसैदी ने स्पष्ट कर दिया कि इस रास्ते का इस्तेमाल करने वाले किसी भी जहाज से कोई ट्रांजिट फीस या टोल टैक्स नहीं लिया जाएगा। यह पूरी तरह से टोल-फ्री कॉरिडोर है।

अब आप खुद सोचिए कि कोई भी शिपिंग कंपनी भारी-भरकम टैक्स देकर ईरान के नियंत्रण वाले खतरनाक रास्ते से क्यों जाना चाहेगी जब उसे ओमान के तट के पास सुरक्षित और मुफ्त रास्ता मिल रहा हो। ओमान का यही कदम ईरान के लिए बड़ा आर्थिक और रणनीतिक झटका साबित हुआ। ईरान की कमाई की उम्मीदों पर पानी फिर गया।

ईरान की तीखी प्रतिक्रिया और आईआरजीसी की धमकियां

जैसे ही ओमान ने इस नए शिपिंग रूट का ऐलान किया ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स की नौसेना शाखा एक्टिव हो गई। आईआरजीसी ने आधिकारिक तौर पर बयान जारी करके कह दिया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में केवल वही मार्ग मान्य होंगे जो तेहरान तय करेगा। इनके अलावा किसी भी अन्य रूट से जहाजों का जाना बेहद खतरनाक है और इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती।

ईरान के उप-विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने भी कड़े शब्दों में चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि ओमान ने बिना तेहरान की मंजूरी के यह नया रास्ता तय किया है जो सुरक्षा के लिहाज से सही नहीं है। बात सिर्फ बयानों तक ही सीमित नहीं रही। इस नए रास्ते का इस्तेमाल कर रहे एक मालवाहक जहाज पर मिसाइल से हमला भी हुआ। हालांकि किसी संगठन ने इसकी सीधी जिम्मेदारी नहीं ली लेकिन टाइमिंग को देखकर साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह हमला क्यों और किसने करवाया होगा।

इस हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र की समुद्री एजेंसी ने अस्थायी रूप से अपना निकासी अभियान रोक दिया। आईएमओ के महानिदेशक आर्सेनियो डोमिंगुएज़ ने साफ किया कि जब तक जहाजों की सुरक्षा की पुख्ता गारंटी नहीं मिलती तब तक फंसे हुए हजारों नाविकों को निकालने का काम संभलकर करना होगा।

वैश्विक तेल बाजार और भारत पर इसका असर

होर्मुज का यह संकट सीधे तौर पर आपकी और हमारी जेब से जुड़ा हुआ है। फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ने वाला यह जलमार्ग दुनिया की कुल तेल सप्लाई का लगभग पांचवां हिस्सा संभालता है। भारत अपनी जरूरत का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से मंगवाता है।

राहत की बात यह है कि इस विवाद के बीच भी भारत की एलएनजी सप्लाई पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार भारत के कई जहाज इस नए रास्ते का उपयोग करके सुरक्षित निकल चुके हैं। ओमान का यह मुफ्त और सुरक्षित कॉरिडोर भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए एक वरदान की तरह है। अगर ईरान यहां मनमाना टोल वसूलने में कामयाब हो जाता तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगतीं। भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम पर इसका सीधा असर पड़ता।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भी खाड़ी देशों का दौरा करके साफ कर दिया है कि वाशिंगटन ओमान के इस नए समुद्री मार्ग को पूरा समर्थन देगा। अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर एकाधिकार करने और अवैध वसूली करने की इजाजत नहीं देगा। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने भी ईरान के टोल प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है।

क्या दोनों देश किसी समझौते पर पहुंच पाएंगे

तनाव बढ़ने के बाद अब दोनों पक्षों के बीच बातचीत का दौर भी शुरू हुआ है। ईरान और ओमान ने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा है कि वे होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन के भविष्य के प्रबंधन के लिए एक संयुक्त कार्य समूह बनाने पर सहमत हुए हैं। दोनों देश अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत सुरक्षित आवाजाही की बात तो कर रहे हैं लेकिन अंदरूनी मतभेद बहुत गहरे हैं।

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ईरान अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए इस जलमार्ग से पैसा कमाना चाहता है और अपनी धौंस बनाए रखना चाहता है। ओमान अपनी तटस्थ छवि को बरकरार रखते हुए अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करना चाहता है। ओमान का यह रुख ईरान को एक तरफ तो बातचीत की मेज पर आने के लिए मजबूर कर रहा है और दूसरी तरफ उसके आक्रामक इरादों के रास्ते में एक बड़ा रोड़ा बन गया है।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि साठ दिनों का यह अंतरिम युद्धविराम किसी स्थाई शांति में बदलता है या फिर होर्मुज में बारूद की गंध एक बार फिर से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को अपनी चपेट में ले लेती है। शिपिंग कंपनियों को अभी भी बेहद सतर्क रहने की जरूरत है।

इस पूरे घटनाक्रम पर नजर रखने के लिए आप नीचे दिए गए कदमों का पालन कर सकते हैं।

  1. अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर होर्मुज जलमार्ग के ताजा नेविगेशन नोटिस और सुरक्षा अलर्ट की जांच करें।
  2. वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और शिपिंग फ्रेट रेट्स के दैनिक आंकड़ों पर नजर रखें क्योंकि यह सीधे तौर पर इस तनाव से प्रभावित होते हैं।
  3. भारत के विदेश मंत्रालय और जहाजरानी मंत्रालय द्वारा भारतीय व्यापारिक जहाजों के लिए जारी की जाने वाली एडवाइजरी को नियमित रूप से पढ़ें।
JW

Jun Wood

Jun Wood is a meticulous researcher and eloquent writer, recognized for delivering accurate, insightful content that keeps readers coming back.