अब्बास अराघची और मोहम्मद बाकर गालिबाफ की हत्या की इजरायली साजिश ने कैसे उड़ा दी अमेरिका की नींद

अब्बास अराघची और मोहम्मद बाकर गालिबाफ की हत्या की इजरायली साजिश ने कैसे उड़ा दी अमेरिका की नींद

जब दो पक्के दोस्त एक-दूसरे की पीठ पीछे चालें चलने लगें, तो समझ जाना चाहिए कि मामला हाथ से निकल चुका है। न्यू यॉर्क टाइम्स और वॉशिंगटन पोस्ट की ताजा रिपोर्ट्स ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कुछ ऐसा ही भूचाल ला दिया है। खबर आई है कि जब अमेरिका और ईरान के बीच पर्दे के पीछे शांति वार्ता चल रही थी, तब इजरायल ईरान के शीर्ष वार्ताकारों की हत्या करने की ताक में बैठा था। विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ इजरायल की हिट लिस्ट में सबसे ऊपर थे।

यह सिर्फ एक हत्या की साजिश नहीं थी। यह अमेरिका के मुंह पर तमाचा मारने जैसी कोशिश थी क्योंकि ये दोनों नेता उस समय अमेरिकी प्रशासन के साथ सीधे बातचीत कर रहे थे। वाशिंगटन को जब इस बात भनक लगी, तो उसके हाथ-पांव फूल गए। अमेरिकी अधिकारियों ने आनन-फानन में तीसरे देशों के जरिए तेहरान तक यह खुफिया जानकारी पहुंचाई ताकि इस संभावित हमले को रोका जा सके।

जब वाशिंगटन और तेल अवीव की राहें अलग हो गईं

युद्ध की शुरुआत में अमेरिका और इजरायल दोनों का एक ही मकसद था। दोनों चाहते थे कि ईरान में सत्ता परिवर्तन हो जाए। इसी रणनीति के तहत जब 28 फरवरी को युद्ध शुरू हुआ, तो अमेरिकी खुफिया इनपुट की मदद से इजरायल ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई समेत कई बड़े नेताओं को ठिकाने लगा दिया।

लेकिन समय बदला और अमेरिका को समझ आ गया कि ईरान का पूरा सिस्टम इतनी आसानी से ढहने वाला नहीं है। वाशिंगटन ने अपनी रणनीति बदली और बातचीत का रास्ता चुना। वहीं दूसरी तरफ इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू किसी भी तरह की शांति वार्ता को मटियामेट करने पर तुले हुए थे। दोनों देशों के बीच का यह मतभेद तब खुलकर सामने आया जब अप्रैल में पहले युद्धविराम के बाद शांति वार्ता तेज हुई।

आसमान में वो खतरनाक रात जब बाल-बाल बचे गालिबाफ

न्यू यॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में एक बेहद चौंकाने वाली घटना का जिक्र है। बात 12 अप्रैल की है। ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से बातचीत करने के बाद इस्लामाबाद से वापस तेहरान लौट रहे थे।

तभी अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को पता चला कि इजरायल के दो लड़ाकू विमान इराक के रास्ते ईरानी हवाई क्षेत्र में घुस चुके हैं। उनका सीधा निशाना गालिबाफ का विमान था। अमेरिका ने तुरंत इसकी जानकारी तेहरान को दी। ईरानी सुरक्षा बलों ने आनन-फानन में विमान का रूट बदला और उसकी इमरजेंसी लैंडिंग पाकिस्तान सीमा के पास मशहद शहर में कराई गई। इसके बाद गालिबाफ को सड़क मार्ग से आठ घंटे का सफर तय कराके सुरक्षित तेहरान पहुंचाया गया। अगर अमेरिका समय पर दखल न देता, तो शायद आज मध्य पूर्व का नक्शा और इतिहास दोनों पूरी तरह बदल चुके होते।

बातचीत के इकलौते रास्ते को बंद करना चाहता था इजरायल

इजरायल ने इससे पहले मार्च में ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी और पूर्व विदेश मंत्री कमल खराजी की हत्या कर दी थी। ये दोनों ही नेता ऐसे थे जिनसे अमेरिका बातचीत की उम्मीद कर रहा था। पश्चिमी अधिकारियों के मुताबिक, लारीजानी की हत्या एक बड़ा टर्निंग पॉइंट थी। अमेरिका को अचानक लगने लगा कि इजरायल जानबूझकर उन सभी चेहरों को खत्म कर रहा है जिनसे बात करके युद्ध को रोका जा सकता है।

📖 Related: how to treat chickens

लारीजानी के जाने के बाद अब्बास अराघची और मोहम्मद बाकर गालिबाफ ही वाशिंगटन के लिए तेहरान से संपर्क साधने के आखिरी बड़े माध्यम बचे थे। अगर इजरायल इन दोनों को भी मार देता, तो बातचीत का सिलसिला हमेशा के लिए खत्म हो जाता। युद्ध दोबारा भड़क उठता और अमेरिकी सैनिक एक बार फिर मध्य पूर्व के दलदल में फंस जाते। यही वजह थी कि ट्रंप प्रशासन ने बैकचैनल डिप्लोमेसी का इस्तेमाल करके पाकिस्तान और कतर के जरिए ईरान को अलर्ट भेजा।

आगे क्या होगा

इस पूरे घटनाक्रम से एक बात साफ है कि इजरायल और अमेरिका के रिश्ते अब पहले जैसे नहीं रहे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और नेतन्याहू के बीच हाल ही में फोन पर हुई तीखी बहस इस बात की गवाह है। ट्रंप ने साफ शब्दों में नेतन्याहू से कहा है कि बहुत से लोग मारे जा चुके हैं और अब उन्हें अधिक जिम्मेदार होना पड़ेगा।

आने वाले दिनों में हमें इस तनाव का असर कतर और स्विट्जरलैंड में होने वाली आगामी बैठकों पर देखने को मिल सकता है। ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक उसे अमेरिकी गारंटी नहीं मिलती कि उसके वार्ताकारों पर हमला नहीं होगा, तब तक बातचीत को आगे बढ़ाना मुश्किल है। इस पूरे मामले पर करीबी नजर रखना जरूरी है क्योंकि वाशिंगटन और तेल अवीव की यह अंदरूनी लड़ाई ही तय करेगी कि दुनिया एक नए वैश्विक युद्ध की तरफ बढ़ेगी या शांति का कोई रास्ता निकलेगा।

EP

Elena Parker

Elena Parker is a prolific writer and researcher with expertise in digital media, emerging technologies, and social trends shaping the modern world.