क्यों ब्रिटेन का सोशल मीडिया नाइट कर्फ्यू सिर्फ एक दिखावा साबित हो सकता है

क्यों ब्रिटेन का सोशल मीडिया नाइट कर्फ्यू सिर्फ एक दिखावा साबित हो सकता है

रात के 12 बज चुके हैं। आपके हाथ में फोन है। आप बस एक आखिरी वीडियो देखना चाहते हैं। लेकिन अचानक स्क्रीन लॉक हो जाती है। ब्रिटेन अपने किशोरों के साथ कुछ ऐसा ही करने की तैयारी कर रहा है.

वहां की सरकार ने 16 और 17 साल के युवाओं के लिए रात के समय सोशल मीडिया पर 'नाइट कर्फ्यू' लगाने का फैसला किया है. इसके तहत आधी रात से सुबह 6 बजे तक सोशल मीडिया ऐप्स ब्लॉक रहेंगे. लेकिन इस योजना में एक बहुत बड़ा पेंच है. यह कर्फ्यू अनिवार्य नहीं है। यह सिर्फ एक डिफॉल्ट सेटिंग के रूप में काम करेगा, जिसे बच्चे जब चाहें बंद कर सकते हैं. You might also find this connected article useful: Why The India North Macedonia Trade Push In 2026 Matters More Than You Think.

तो क्या यह सच में काम करेगा? या फिर यह सिर्फ एक और सरकारी पीआर स्टंट है? आइए इस पूरे मामले की हकीकत को समझते हैं।


क्या है यह सोशल मीडिया नाइट कर्फ्यू

ब्रिटेन की लेबर सरकार ने हाल ही में ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े नए प्रस्तावों की घोषणा की है. इसके तहत 16 और 17 साल के टीनएजर्स के लिए रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक सोशल मीडिया ऐप्स का एक्सेस अपने आप बंद हो जाएगा. सरकार इसे "डिफॉल्ट सेटिंग" कह रही है. यानी जैसे ही कोई नया अकाउंट बनेगा या मौजूदा अकाउंट अपडेट होगा, यह सेटिंग अपने आप ऑन हो जाएगी. As discussed in detailed articles by TIME, the implications are significant.

हालांकि, सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि किशोर इस सेटिंग को बदल सकते हैं. वे चाहें तो इसे डिसेबल करके रातभर स्क्रॉलिंग जारी रख सकते हैं.

इसके साथ ही कुछ और बदलाव भी किए जा रहे हैं:

  • ऑटोप्ले बंद होगा: एक वीडियो खत्म होने के बाद दूसरा अपने आप शुरू नहीं होगा.
  • अनंत स्क्रॉलिंग पर रोक: लगातार नीचे की तरफ स्क्रॉल करते जाने वाले फीचर को डिफॉल्ट रूप से बंद किया जाएगा.
  • एआई चैटबॉट्स पर ब्रेक: 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए चैटबॉट्स का इस्तेमाल करते समय बीच-बीच में ब्रेक लेने के संकेत दिए जाएंगे.

यह बदलाव उस बड़े फैसले के बाद आया है, जिसमें सरकार ने अगले साल की शुरुआत से 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की बात कही थी. सरकार का मानना है कि 16 साल की उम्र में सुरक्षा को अचानक हटा देने से अच्छा है कि उनके लिए सुरक्षा के कुछ नियम धीरे-धीरे कम किए जाएं.


क्या वाकई टीनएजर्स इस कर्फ्यू को मानेंगे

इस योजना के सामने सबसे बड़ा सवाल इसकी प्रभावशीलता को लेकर खड़ा हो गया है. विपक्ष और कई बाल सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि जो बच्चे सोशल मीडिया के आदी हो चुके हैं, वे केवल दो क्लिक करके इस सेटिंग को बंद कर देंगे.

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कंज़र्वेटिव पार्टी की प्रवक्ता लॉरा ट्रॉट ने इस पर तंज कसते हुए कहा, "या तो आप मानते हैं कि 16 और 17 साल के बच्चों को सोशल मीडिया पर होना चाहिए या आप नहीं मानते। ऐसे कर्फ्यू का क्या मतलब जिसे बच्चे खुद ही बंद कर सकते हैं? इससे कुछ हासिल नहीं होने वाला।"

5Rights फाउंडेशन की संस्थापक बीबन किड्रॉन ने भी सरकार की इस नीति को आड़े हाथों लिया। उनके मुताबिक, "यह बदलाव बच्चों के भले के लिए नहीं, बल्कि केवल मीडिया की सुर्खियों में बने रहने के लिए तैयार किया गया है।"

लेकिन सरकार के पास इस आलोचना का एक जवाब है. ऑनलाइन सुरक्षा मंत्री कनिष्क नारायण ने इस बात का बचाव किया है. उनका कहना है कि टीनएजर्स को कम आंकना गलत होगा. उन्होंने 300 से अधिक परिवारों पर किए गए एक सरकारी ट्रायल का हवाला दिया. इस ट्रायल में सामने आया कि जब बच्चों के फोन में डिफ़ॉल्ट रूप से कर्फ्यू सेटिंग लागू की गई, तो उनकी नींद की गुणवत्ता और पढ़ाई में ध्यान लगाने की क्षमता में भारी सुधार हुआ. कनिष्क नारायण के मुताबिक, पहले के परीक्षणों में भी लगभग 90% से अधिक टीनएजर्स ने इन डिफॉल्ट सेटिंग्स को बंद नहीं किया और उन्हें ऑन ही रहने दिया.


टीनएजर्स का क्या कहना है

इस फैसले पर खुद उन युवाओं की राय काफी बंटी हुई है, जिन पर यह लागू होने वाला है. 16 साल के हार्वे का मानना है कि इस नियम को स्वैच्छिक बनाने से इसका पूरा महत्व ही खत्म हो जाता है. उनका कहना है कि अगर कोई इंस्टाग्राम का आदी है, तो वह निश्चित रूप से इस सेटिंग को बंद कर देगा.

वहीं, स्कॉटलैंड के रहने वाले 16 वर्षीय एलेक्स ने इस फैसले को बेतुका बताया. उनका कहना है, "स्कॉटलैंड में 16 साल की उम्र में आप शादी कर सकते हैं, टैक्स दे सकते हैं और नौकरी कर सकते हैं। लेकिन आप रात में अपना फोन इस्तेमाल नहीं कर सकते? यह अजीब है।"

यह प्रतिक्रिया दर्शाती है कि कानून लागू करना उतना आसान नहीं होगा जितना सरकार सोच रही है.


माता-पिता और आपके लिए आगे का रास्ता

अगर आप एक माता-पिता हैं या खुद एक टीनएजर हैं, तो आपको इस तरह के सरकारी फैसलों पर पूरी तरह निर्भर रहने की जरूरत नहीं है. डिजिटल वेलबीइंग को अपने हाथ में लेने के लिए आप आज ही कुछ व्यावहारिक कदम उठा सकते हैं:

  1. डिफॉल्ट स्क्रीन टाइम सेटिंग्स का खुद इस्तेमाल करें: आईफोन और एंड्रॉयड दोनों में ही 'डाउनटाइम' या 'डिजिटल वेलबीइंग' के विकल्प मौजूद होते हैं। रात 11 बजे से सुबह 6 बजे तक के लिए खुद ही ऐप्स को ब्लॉक करने की आदत डालें।
  2. बिस्तर से दूर रखें फोन: नींद की सबसे बड़ी दुश्मन फोन की ब्लू लाइट और लगातार आने वाले नोटिफिकेशन हैं। सोने से कम से कम आधे घंटे पहले फोन को खुद से दूर चार्जिंग पर लगा दें।
  3. ग्रेस्केल मोड का इस्तेमाल करें: फोन की रंग-बिरंगी दुनिया हमारे दिमाग में डोपामाइन बढ़ाती है। रात के समय अपने फोन को ब्लैक एंड व्हाइट (ग्रेस्केल) मोड पर डाल दें। इससे स्क्रीन का आकर्षण काफी हद तक कम हो जाता है।
  4. बेडरूम को नो-फोन जोन बनाएं: बच्चों के कमरों में रात के वक्त फोन ले जाने पर रोक लगाएं। शुरू में यह मुश्किल लग सकता है, लेकिन नींद और मानसिक स्वास्थ्य के लिए यह बेहद जरूरी है।

ब्रिटेन का यह कदम भले ही अभी चर्चाओं में हो और इसे लागू होने में साल 2027 की शुरुआत तक का समय लग सकता है, लेकिन यह हमें अपनी ऑनलाइन आदतों पर सोचने का मौका जरूर देता है।

MJ

Miguel Johnson

Drawing on years of industry experience, Miguel Johnson provides thoughtful commentary and well-sourced reporting on the issues that shape our world.